GST बिल कैसे बनाएं? इसके लिए आप एक टैक्स इनवॉइस जारी करते हैं जिसमें कुछ तय जानकारी होती है — आपका GSTIN, एक यूनिक इनवॉइस नंबर, हर आइटम का HSN कोड और टैक्स, और बिक्री के हिसाब से सही CGST/SGST या IGST का बंटवारा। यह गाइड आपको स्टेप-बाय-स्टेप बताती है कि GST बिल कैसे बनाएं, साथ में एक छोटी दुकान का उदाहरण, इनवॉइस नंबरिंग का नियम, और वे आम गलतियां जो रिटर्न भरते समय परेशानी बनती हैं।
बिल बनाने से पहले क्या तैयार रखें
एक भी बिल लिखने से पहले ये चीज़ें हाथ में रखें:
- आपकी दुकान का GSTIN और रजिस्टर्ड पता।
- मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए एक चलता हुआ इनवॉइस नंबर सीरीज़।
- हर आइटम का HSN कोड और उसकी GST दर।
- ग्राहक का राज्य (प्लेस ऑफ सप्लाई) — यही तय करता है कि कौन-सा टैक्स लगेगा।
GST बिल कैसे बनाएं — स्टेप बाय स्टेप
- दुकान की जानकारी डालें। ऊपर अपनी दुकान का नाम, पता और GSTIN छापें। इससे आप एक रजिस्टर्ड सप्लायर के रूप में पहचाने जाते हैं।
- बिल को नंबर और तारीख दें। अपनी सीरीज़ का अगला नंबर और आज की तारीख DD/MM/YYYY फॉर्मेट में डालें।
- ग्राहक जोड़ें। बिज़नेस (B2B) बिक्री के लिए ग्राहक का नाम, पता और GSTIN दर्ज करें। आम वॉक-इन ग्राहक के लिए नाम काफ़ी है — पर अगर बिक्री ₹50,000 या उससे ज़्यादा की है, तो उसका नाम, पता और राज्य दर्ज करना ज़रूरी है।
- हर आइटम लिखें। आइटम का नाम, HSN कोड, मात्रा और रेट लिखें, फिर टैक्सेबल वैल्यू (छूट के बाद की आइटम कीमत)।
- टैक्स लगाएं। पहले तय करें कि बिक्री राज्य के अंदर है या बाहर, फिर CGST + SGST या IGST की लाइन जोड़ें (नीचे समझाया है)।
- कुल जोड़ें। टैक्सेबल वैल्यू और टैक्स जोड़ें, नज़दीकी रुपये में राउंड करें, और अंतिम रकम दिखाएं। बिल पर हस्ताक्षर करें।
GST टैक्स इनवॉइस के ज़रूरी फील्ड
CGST नियमों के Rule 46 के तहत (cbic.gov.in पर देखें), माल के टैक्स इनवॉइस में ये विवरण होने चाहिए:
| # | फील्ड | छोटी दुकान के लिए नोट |
|---|---|---|
| 1 | दुकान का नाम, पता और GSTIN | ऊपर एक बार छपता है। |
| 2 | इनवॉइस नंबर | साल भर यूनिक और लगातार; ज़्यादा से ज़्यादा 16 अक्षर। |
| 3 | जारी करने की तारीख | DD/MM/YYYY। |
| 4 | ग्राहक का नाम, पता और GSTIN | GSTIN सिर्फ़ रजिस्टर्ड (B2B) ग्राहक के लिए। |
| 5 | हर आइटम का HSN कोड | टर्नओवर के हिसाब से 4 या 6 अंक — नीचे देखें। |
| 6 | विवरण, मात्रा और यूनिट | जैसे “कॉपी, 10 नग”। |
| 7 | टैक्सेबल वैल्यू | प्रति-आइटम छूट के बाद की कीमत। |
| 8 | टैक्स दर और रकम | CGST + SGST, या IGST। |
| 9 | प्लेस ऑफ सप्लाई | ग्राहक का राज्य — बंटवारा तय करता है। |
| 10 | रिवर्स चार्ज | आम रिटेल बिक्री में आम तौर पर “नहीं”। |
| 11 | हस्ताक्षर | सप्लायर के फ़िज़िकल या डिजिटल हस्ताक्षर। |
HSN अंकों पर: Notification 78/2020 – Central Tax के अनुसार, जिन दुकानों का कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है वे 4 अंकों का HSN कोड और जिनका ₹5 करोड़ से ऊपर है वे 6 अंक दिखाते हैं। नियम बदल सकते हैं, इसलिए मौजूदा ज़रूरत gst.gov.in पर या अपने CA से पक्की करें।
CGST + SGST या IGST? यही नियम बिल तय करता है
आप कौन-सा टैक्स लगाएंगे यह इस बात पर निर्भर करता है कि बिक्री कहाँ सप्लाई हो रही है, न कि ग्राहक कहाँ खड़ा है:
- एक ही राज्य में (इंट्रा-स्टेट): GST को CGST + SGST में बाँटें, हर एक आधी दर पर।
- अलग राज्य में (इंटर-स्टेट): पूरी दर का एक ही IGST लगाएं।
एक उदाहरण
रमेश की जयपुर, राजस्थान में एक जनरल स्टोर है। वे 10 कॉपियां ₹50 प्रति के हिसाब से राजस्थान के ही एक वॉक-इन ग्राहक को बेचते हैं। मान लीजिए इन कॉपियों पर 12% टैक्स है (अपनी आइटम की मौजूदा दर हमेशा पक्की करें)।
- टैक्सेबल वैल्यू = 10 × ₹50 = ₹500।
- यह इंट्रा-स्टेट बिक्री है, तो 12% बँटकर CGST 6% = ₹30 और SGST 6% = ₹30 बनता है।
- बिल का कुल = ₹500 + ₹30 + ₹30 = ₹560।
अगर यही ऑर्डर दिल्ली के ग्राहक को जाता, तो यह इंटर-स्टेट होता: IGST 12% = ₹60, और कुल फिर भी ₹560 रहता — पर दो लाइन की जगह एक IGST लाइन में दिखता।
एक नमूना बिल कुछ ऐसा दिखेगा:
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रमेश जनरल स्टोर GSTIN: 08ABCDE1234F1Z5
15 एमआई रोड, जयपुर, राजस्थान - 302001
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Tax Invoice No: INV2026-27/0042 Date: 10/07/2026
Bill to: वॉक-इन ग्राहक Place of supply: राजस्थान (08)
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आइटम HSN मात्रा रेट टैक्सेबल GST रकम
कॉपी 4820 10 नग 50 500.00 12% 560.00
------------------------------------------------------------
टैक्सेबल वैल्यू: 500.00
CGST (6%): 30.00
SGST (6%): 30.00
राउंड ऑफ: 0.00
कुल: ₹ 560.00
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इनवॉइस नंबरिंग: पूरे साल इसे साफ़ रखें
आपके इनवॉइस नंबर एक वित्तीय वर्ष के अंदर यूनिक और लगातार होने चाहिए (भारत में यह
1 अप्रैल → 31 मार्च चलता है), और सीरियल ज़्यादा से ज़्यादा 16 अक्षर का हो सकता है।
एक आम, सुरक्षित फॉर्मेट है — प्रीफ़िक्स + साल + चलता हुआ नंबर, जो हर 1 अप्रैल को 0001 पर
रीसेट होता है:
INV2026-27/0001
INV2026-27/0002
...
नंबर छोड़ना या दोहराना ही रिटर्न भरते समय मिसमैच की वजह बनता है, इसलिए इसे ऑटोमेट करना फ़ायदेमंद है।
बचने लायक आम गलतियां
- गलत टैक्स टाइप। इंटर-स्टेट बिक्री पर CGST + SGST लगाना (या लोकल पर IGST)।
- टूटी नंबरिंग। साल भर में इनवॉइस नंबर में गैप या दोहराव।
- प्लेस ऑफ सप्लाई गायब। इसके बिना सही बंटवारा साबित नहीं होता।
- HSN नहीं, या टर्नओवर के हिसाब से गलत अंक।
- बीच में राउंडिंग। सिर्फ़ अंतिम कुल को, नज़दीकी रुपये में राउंड करें।
बिना झंझट के बिल बनाना
ऊपर की सारी चीज़ें आप हाथ से या स्प्रेडशीट में कर सकते हैं। ज़्यादातर दुकानें ऐसा इसलिए नहीं करतीं क्योंकि काउंटर पर स्पीड और सटीकता चाहिए: टैक्स का बंटवारा, HSN और चलता इनवॉइस नंबर हर बिक्री पर सही होने चाहिए, उस भाषा में जो आपके ग्राहक पढ़ते हैं, और जो भी प्रिंटर आपके पास है उस पर।
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- क्या-क्या शामिल है, फ़ीचर्स पेज पर देखें।
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नए हैं? हमारी साथी गाइड GST invoice format for small shops से शुरू करें, जो हर ज़रूरी फील्ड को विस्तार से समझाती है। अंग्रेज़ी में यही गाइड पढ़ें: How to Make a GST Bill।
यह लेख सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। GST नियम, दरें और सीमाएं बदलती रहती हैं — मौजूदा स्थिति gst.gov.in पर या अपने CA से पक्की करें।